Agriculture

भारत का दुग्ध उद्योग – India’s dairy industry

भारत गांवों में बसता है। हमारी 72%  से अधिक जनसंख्या ग्रामीण है तथा 60% लोग कृषि व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। करीब 7 करोड़ कृषक परिवार में प्रत्येक दो ग्रामीण घरों में से एक डेरी उद्योग से जुड़े हैं। भारतीय दुग्ध उत्पादन से जुड़े महत्वपूर्ण सांख्यिकी आंकड़ों के अनुसार देश में 70% दूध की आपूर्ति छोटे/ सीमांत/ भूमिहीन …

भारत का दुग्ध उद्योग – India’s dairy industry Read More »

क्या है संधारणीय कृषि अथवा टिकाऊ कृषि ?

बदलते पर्यावरण अर्थातृ धरती के तापक्रम में वृध्दि, समुद्र के स्तर में बढ़ोतरी एवं ओजोन की परत में क्षति आदि नई उत्पन्न विषमताओं में कृषि को संधारणीयता देने के साथ-साथ बढ़ती आबादी को अन्न खिलाने के लिए उत्पादकता के स्तर पर क्रमागत वृध्दि करना ही टिकाऊ खेती है। दूसरे शब्दों में वह खेती है, जो …

क्या है संधारणीय कृषि अथवा टिकाऊ कृषि ? Read More »

उर्वरक (Fertilizers)- वर्गीकरण, पौधों के लिये आवश्यक पोषक तत्व तथा प्रमुख रासायनिक उर्वरक

  उर्वरक (Fertilizers) कृषि में उपज बढ़ाने के लिए प्रयुक्त रसायन हैं जो पेड-पौधों की वृद्धि में सहायता के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। पानी में शीघ्र घुलने वाले ये रसायन मिट्टी में या पत्तियों पर छिड़काव करके प्रयुक्त किये जाते हैं। पौधे मिट्टी से जड़ों द्वारा एवं ऊपरी छिड़काव करने पर पत्तियों द्वारा उर्वरकों …

उर्वरक (Fertilizers)- वर्गीकरण, पौधों के लिये आवश्यक पोषक तत्व तथा प्रमुख रासायनिक उर्वरक Read More »

बिना पानी के खेती कैसे की जाती है ? । शुष्क कृषि । What is Dryland Farming in Hindi

शुष्क-भूमि कृषि (Dryland farming) सिंचाई किये बिना ही कृषि करने की तकनीक है। यह उन क्षेत्रों के लिये उपयोगी है जहाँ बहुत कम वर्षा होती है। इसके अंतर्गत उपलब्ध सीमित नमी को संचित करके बिना सिंचाई के ही फसलें उगायी जाती हैं। वर्षा की कमी के कारण मिट्टी की नमी को बनाये रखने तथा उसे …

बिना पानी के खेती कैसे की जाती है ? । शुष्क कृषि । What is Dryland Farming in Hindi Read More »

पारिस्थितिकी (इकोलॉजी) तथा मानव से सम्बन्ध

पारिस्थितिकी (इकोलॉजी) पारिस्थितिकी (इकोलॉजी) जीव विज्ञान की वह शाखा है जिसके अन्तर्गत जीवों और उसके बाह्य वातावरण के पारस्परिक संबंधों का अध्ययन किया जाता है।, प्रत्येक जन्तु या वनस्पति एक निश्चित वातावरण में रहता है। इकोलॉजी को तीन शाखाओं में बाँटा गया है- स्वपारिस्थितिकी – इसके अन्तर्गत किसी एक जीव विशेष या एक ही जाति के …

पारिस्थितिकी (इकोलॉजी) तथा मानव से सम्बन्ध Read More »

फसलों के उत्पादन तथा वितरण को प्रभावित करने वाले भौतिक और सामजिक कारक

भौतिक कारक जलवायु– जलवायु कृषि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पौधों को उनके विकास के लिए पर्याप्त गर्म तथा नम जलवायु की आवश्यकता होती है। पौधे के अानुवंशिक गुण भी जलवायु से प्रभावित होकर प्रदर्शित होते हैं | तापमान – फसल उत्पादन के लिय अनुकूल  तापमान की आवश्यकता होती है अनुकूल तापमान पर इन्जाइम की …

फसलों के उत्पादन तथा वितरण को प्रभावित करने वाले भौतिक और सामजिक कारक Read More »

भारतीय अर्थव्यवस्था (भारतीय कृषि से सम्बंधित महत्वपूर्ण तथ्य)

वर्तमान में भारत के GDP में कृषि क्षेत्र का 17.1% योगदान है, जबकि 1950-51 में कृषि क्षेत्र का योगदान 55.40 % था भारत में कृषि क्षेत्र का 60% भाग पूर्णत: वर्षा पर निर्भर है भारत में कृषि क्षेत्र के GDP का 0.3 % भाग कृषि शोध पर खर्च किया जाता है प्रथम कृषि गणना 1970 …

भारतीय अर्थव्यवस्था (भारतीय कृषि से सम्बंधित महत्वपूर्ण तथ्य) Read More »

प्रमुख प्रदूषक की सूची, स्रोत तथा मानव और पर्यावरण पर उनके प्रभाव

प्रदूषक एक ऐसा पदार्थ है जो विशेषकर पानी या वायुमंडल को प्रदूषित करता है. यह ज्वालामुखी विस्फोट, कोयला और गैसोलीन को जलाने तथा अन्य मानवीय गतिविधियों के माध्यम से वातावरण में प्रवेश करता है। यहां, हम सामान्य जागरूकता के लिए प्रमुख प्रदूषकों की सूची, उनके स्रोत और मानव और पर्यावरण पर उनके प्रभाव का विवरण …

प्रमुख प्रदूषक की सूची, स्रोत तथा मानव और पर्यावरण पर उनके प्रभाव Read More »

जैव उर्वरक (बायोफर्टिलाइजर) क्या होते हैं ?

भूमि की उर्वरता को टिकाऊ बनाए रखते हुए सतत फसल उत्पादन के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने प्रकृतिप्रदत्त जीवाणुओं को पहचानकर उनसे बिभिन्न प्रकार के पर्यावरण हितैषी उर्वरक तैयार किये हैं जिन्हे हम जैव उर्वरक (बायोफर्टिलाइजर) या ‘जीवाणु खाद’ कहते है। दूसरे शब्दों में हम कह सकते है की जैव उर्वरक जीवित उर्वरक है जिनमे सूक्ष्मजीव …

जैव उर्वरक (बायोफर्टिलाइजर) क्या होते हैं ? Read More »

Scroll to Top