भागवत्, वैष्णव एवं शैव धर्म से परीक्षाओं में पूछे जाने वाले तथ्य


जब भी धर्म की बात आती है तो हम सब उसे किसी ना किसी धार्मिक किताब से जोड़ कर देखने लगते हैं | कभी कभी ये भी कह देते हैं कि ये हमारे धर्म में नहीं है, या हमारा धर्म उस धर्म से बेहतर है, या फिर वो धर्म अच्छा नहीं है |

अच्छा एक बात बताइये उस ऊपर वाले ने जिसने भी हमें बनाया इतना बड़ा शरीर बना दिया इतना बड़ा सिस्टम बना दिया, सब कुछ कर दिया और फिर उसके बाद किताबें लिखी? कि कैसे काम करना है या क्या करना है?, अगर वो इतना कुछ कर सकता है तो ये धर्म वाली किताबें हमारे दिमाग में डाल के क्यूँ नहीं भेजी, बाद में क्यूँ भेजी |
अब एक दूसरी बात अलग अलग धर्म वाले लोग अलग अलग शक्ति में विश्वास करते हैं कि मुझे उसने बनाया है, ठीक है इसमें कोई बुराई नहीं है पर दूसरे को बुरा कहना ये कौन सा धर्म सिखाता है | सारे ही धर्म तो कहते हैं कि अच्छे इंसान बनो , निंदा से बचो, हिंसा मत करो, चोरी मत करो, झूठ मत बोलो |
जब सारे ही धर्म अच्छा इंसान बनाते हैं तो फिर वो अलग कैसे हुए, ये तो उसी प्रकार है जैसे अलग अलग अध्यापक एक ही विषय पढ़ा रहे हों, तब आप ऐसा तो नहीं करते कि नहीं जी वो अध्यापक अच्छा नहीं है और उस बात पर लड़ने लगते हों |
अब चलिये समझते हैं धर्म का वास्तविक अर्थ

देखिये जिसने हमें बनाया है ना उसने वास्तव में ये हमारे अंदर ही डाल कर भेजा है ये बात और है कि हम इसे नजरंदाज कर देते हैं,

कभी किसी वृद्ध को रास्ता पार कराया है ? जब वो आपको थैंक्स बोलता है तब आप क्या कहते हैं ? “ये तो मेरा धर्म था, या फर्ज था या कर्तव्य बनता है|” वो है धर्म
किसी भी घायल जानवर या व्यक्ति को देखकर जो आपके मन में दया के भाव उठते हैं ना और उसे मदद करने का मन होता है ना वो है धर्म
लोगों के प्रति जो भी व्यवहार आप करते हैं, जो भी कर्तव्य आपके हैं, भाई के प्रति, बहन के प्रति, माँ के प्रति, पिता के प्रति वो सब धर्म ही तो हैं |
कुछ भी गलत करते वक्त जब आपका मन आपको बता देता है ना कि ये ठीक नहीं है वो है धर्म
किसी दूसरे को खुश करके जो खुशी आपके मन में उत्पन्न होती है ना वो है धर्म
धर्म को यदि दूसरे शब्द में कहूँ तो धर्म कर्तव्य है, जिनका एहसास आपको स्वयं ही हो जाता है |
बस ये समझ जाइए कि धर्म आपके अंदर ही है बस आवश्यकता है तो उसे समझने की एक बार आप समझ गए तो ना फिर आप किसी के धर्म को हेय दृष्टि से देखेंगे और ना ही कभी इस बात पर लड़ेंगे, और ये दुनिया एक खूबसूरत जगह बन जाएगी
ये पोस्ट किसी भी धर्म का अनादर करने के लिए नहीं लिखी गयी है, यदि फिर भी किसी की भावनाएं आहत होती हैं तो मैं उसके लिए क्षमा चाहता हूँ |



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